इस चुनाव में ....... आगे-आगे देखिये होता है क्या !
बी जे पी
06.04.१९८0
११.४५ pm
दिल्ली
जे ड यु
30 अक्टूबर
जन्मा समय : ..
दिल्ली
नितीश कुमार
01.03.1951
1.20 pm
लक्खीसराय
प्रशांत किशोर
20.03.1977
शाहाबाद
जन सुराज
02.10.2024
04.05 pm
पटना
चिराग पासवान
31.१०.१९८२
12.15 pm
मधुबनी
बीजेपी को एकतरफा बहुमत नहीं मिलेगा ।
बीजेपी की कुंडली में चंद्र नीच राशि की महादशा है जो कि द्वितीयेश है । महादशानाथ कमजोर होने से सुप्पोर्टिंग पार्टी या कंडीडेट के आधार पर सरकार बनती है सत्ता मिलती है अथवा सत्ता में शामिल होती है । द्वितीयेश कुटुंब घर का स्वामी होता है इसलिए इसके निर्बल होने से अक्सर सीमित लोग और पार्टी का सहयोग मिलेगा । विशेषकर इसकी दशा में ।
पिछले प्रदर्शन के आधार पर जो लोग जेडयू बनाम जनता दल युनाइटेड को अंडरएस्टीमेट कर रहे हैँ, वो भूल कर रहे हैँ ।
इसकी सीटें बढ़ेंगी और अच्छा बेहतर प्रदर्शन करेंगी ।
प्रशांत किशोर दो धुर प्रतिद्वंदियों एनडीए व आरजेडी तथा जीतन राम मांझी, चिराग पासवान ऐसे अन्य मुख्य एवं वोट बैंक चेहरों के होते भी एक नये उभरते चुनावी चेहरे के रूप में चर्चित होकर अपना प्रभाव छोड़ चुके हैँ ।
इसका लाभ उन्हें सीट के रूप में अवश्य मिलेगा । जो लोग उनके खाता खुलने में संदेह कर रहे हैँ, संदेह दूर हो जाएगा ।
लोजपा चिराग पासवान आश्चर्यचकित करते हैँ । लगता था कि प्रशांत किशोर के आने से कहीं ये हाशिये पर ना चले जाएं या इनका वोट प्रभावित ना हो । पहला तो ऐसा नहीं होगा । अगर हो भी गया तब भी पद के मामले में भाग्यशाली होंगे । अर्थात सीट कम मिलने या आने के बाद भी इनको पद या अन्य लाभ या विशेष लाभ की स्थिति बिल्कुल बनती है ।
आश्चर्यजनक रूप से चिराग पासवान की कुंडली तुलनात्मक अध्ययन में अन्य सबों से अधिक प्रबल है ।
अगर सारांश देखा जाए तो राजग गठबंधन जीत रहा है ।
'सरकार किसी की भी बने, प्रशांत किशोर और चिराग पासवान उसमें अंदर या बाह्रर से अवश्य शामिल होने जा रहे हैँ ।
इसमे भी चिराग के सरकार में शामिल होने की अधिक संभावना है जबकि प्रशांत किशोर बाहर से समर्थन दे सकते हैँ । अगर शामिल हो भी जाएं तब भी अपने कंडीडेट के लिए भले कुछ मांग लें मगर स्वयं किसी पद पर काबिज नहीं होंगे । अगर होंगे भी तो उपमुख्यमत्री पड़ पर । इसके पीछे कारण उनका स्वयं को सीएम पद के लिए स्वयं को प्रमोट करना मना जा सकता है । ऐसी स्थिति मैं कोई भी उससे कम पड़ पर सोच समझकर आसीन होता है । इसलियर ऐसी स्थति में इनका बाहेर से समर्थन देने की अधिक सम् भावना दिखती है अथवा सरकार में शामिल होने पर स्वयं को किसी अति महत्वपूर्ण सम्मानीय पड़ पर आसीन होना चाहेंगे । और जिसकी सरकार होती है उसका सबसे प्रमुख पड़ तो नहीं हि मिल सकता है क्योंकि उसपर तो स्वाभाविक रूप से उनका हि लीडर बैठेगा । तो फिर इसके बाद का सबसे महत्वपूर्ण पड़ बनता है । इस मामले मैं सबसे मिख्या पड़ वाह है जिसके लिए चुनाव हो रहा है मुख्या मंत्री पड़ का । इसके बाद का पड़ है उप-मुख्यमंत्री का । इसलियर प्रशांत किशोर किसी और की सरकार को या तो बाहेर से समर्थन देंगे अथवा सरकात में शामिल होने पर स्वयं हेतु ममहत्वपूर्ण पड़ लेंगे और् या अथवा अपने कंडीडेट के लिए उचित स्थान पर मानकर स्वयं कोई पड़ नहीं लेंगे । एक सीएम प्रत्यासी किसी और की सरकार में शामिल हो अपने लिए पद ना ले, इसकी कम संभावना दिखती है क्योंकि यह प्रैक्टिकली कम संभव दिखती है । इसलिए सरकार को बाहर से समर्थन देंगे, ऐसा लगता है । अपनी शतों पर !
ऐसा भी हो सकता है कि मुख्यमंत्री नितीश के अंदर दो उप मुख्यमंत्री में प्रशांत किशोर और चिराग पासवान हों । हलाकि प्रमुख सहयोगी पार्टी बी जे पी के खराब प्रदर्शन के बिना यह संभव नहीं है । मगर बीजेपी की स्थिति जे ड यूं से काफी बेहतर है । ऐसे में नितीश अपने प्रमुख सहयोगी पार्टी को कभी नाराज नहीं करना चाहेंगे ।
इसका मतलब यह हुआ कि फिर प्रशांत किशोर और चिराग पासवान इनकी सरकार में उप मुख्यमंत्री के अलावे किसी अन्य मुख्य स्थान पर होंगे या उन्हें अन्य विशेष लाभ मिले । चिराग पासवान तो उनकी सेन्ट्रल सरकार में मंत्री हैँ तो शायद मान भी जाएं मगर प्रशांत किशोर उप-मुख्य मंत्री से कम का या अन्य कोई पद् लें संभव नहीं दिखता । इसलिए पुन् उनकी सरकार को बाहर से समर्थन या सशर्त शर्त समर्थन की समभावना बनती है ।
राजद को वोट और शीट तो मिलेंगे मगर समुचित वोट और सहयोग ना मिलने से सत्ता मिलने में संदेह है ।
अगर इनको प्रशांत किशोर और चिराग पासवान का साथ मिले तब ही कोई बात बन सकती है । क्यूंकि इन दोनो की कुंडली में सत्ता कारक योग हैँ ।
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